छत्तीसगढ़

अंबिकापुर : कुदरत का करिश्मा, छत्तीसगढ़ के शिमला में उलटा पानी

अम्बिकापुर : प्रकृति ने धरती को बडे ही अदब और कद्र से संवारा है । इसके साथ ही कुदरती इंजीनियरिंग के कुछ ऐसे भी नायाब नमूने हैं जो लोगों को हैरान करने के लिए काफी हैं। दरअसल प्रकृति की गोद मे बसा छत्तीसगढ़ का शिमला जिसे मैनपाट के नाम से जाना जाता है, यहां एक ऐसी जगह है जहां पानी पहाड़ी की ढलान पर नही बल्कि ऊंचाई की ओर बहता है। यह हैरान करने वाली जगह अब लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींच रही है।

दूर-दूर तक हरियाली, घने वन, ऊंचे दरख़्त और खूबसूरत वादिया कुछ ऐसा ही है हमारा मैनपाट। छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में कई लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट हैं। यह छत्तीसगढ़ में अपना एक अलग और खास मुकाम रखता है। लेकिन अभी हाल ही में यहां एक ऐसी जगह का पता चला है जिसने लोगों को हैरान किये हुवे है। दरासल मैनपाट के बिरसापानी गांव में एक ऐसा इलाका है जहां एक आम के पेड़ के करीब रखे पत्थर के नीचे से पानी रिसता है। यह रिसाव कोई साधारण नही बल्कि रिसता हुवा पानी नाले की शक्ल में ढलान के बजाय ऊंचाई की ओर बहता है। हांलाकि इस जगह का पता अभी हाल ही में लोगों को चला है। कुछ इसे कुदरत का चमत्कार मान रहे हैं तो कुछ इसे किसी दैवीय शक्ति का कारनामा। फिलहाल पर्यटन अमला इसे छत्तीसगढ़ की एक नई पहचान के नजरिये से देख रहा है। लकुदरतु इंजीनियरिंग का नायाब नामना यह उल्टा पानी अपने आप मे बेहद खास होता जा रहा है। मैनपाट की वादियों में बसे इस इलाके का नाम ही पानी रिसने को लेकर पड़ा है क्योंकि बिरसापानी का मतलब ही पानी का रिसना होता है। कागज की नाव हो या फिर सूखे पत्ते पानी की धार में डाल कर इसका खुद ही सहज अंदाजा लागाया जा सकता है। बजरहाल कई रहस्यों को अपने आँचला मे समेटे मैनपाट की फिजाओं ने एक बार फिर लोगों को अद्भुद और अकल्पनीय मैनपाट का अहसास कराया है।

पर्यटन को बढ़ावा
इस अजूबे ने जहां पर्यटन अमले को पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई राह दिखलाई है तो वहीं पर्यटक यहां इस अजूबे को देखने रोजाना इकट्ठा हो रहे है। वहीं मैनपाट के टूरिस्ट ऑफिसर सौरभ वर्मा ने बताया कि यह जगह पर्यटन के लिहाज से एक नया स्थल मैनपाट के लिए होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इसके लिए प्रयास भी किये जा रहे है।

डॉक्टर रमेश कुमार जायसवाल (विभागाध्यक्ष भूगोल पीजी कॉलेज) जिस जगह से पानी रिस रहा है उसका जल स्त्रोत ऊंचाई पर होगा और हो सकता है उसके फोर्स की वजह से पानी ऊंचाई की ओर बह रहा होगा। गुरुत्वाकर्षण का भी असर हो सकता है फि़ल्हाज यह शोध का विषय है तब शायद सही कारणों का पता चल सकता है।

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