उत्तर प्रदेश

जनता के विश्वास पर खरा न उतरने वाले जनप्रतिनिधियों को एक सेकंड भी कुर्सी पर रहने का हक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान 10 सितंबर को बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट के अनुसार अगर कोई जन प्रतिनिधि जनता की इच्छानुसार या विश्वास वाला काम करने में असमर्थ है तो उसे पावर में रहने का अधिकार एक सेकंड के लिए भी नहीं है.

हाईकोर्ट के अनुसार लोकतंत्र सरकार का वह हिस्सा है, जिसमें देश के राजनेता जनता द्वारा निष्पक्ष रूप से चुनाव में चुने जाते हैं. लोकतंत्र में जनता के पास सत्ता में लाने के लिए उम्मीदवारों और दलों का विकल्प होता है. जनता सम्राट होती है. जनता ही सबसे बड़ी अथॉरिटी होती है और सरकार लोगों की इच्छाशक्ति पर आधारित होती है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगे कहा कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों को लोगों की आवाज जरूर सुननी चाहिए. साथ ही उनकी जरूरत पूरी करने का भी काम करना चाहिए. ऐसे में जनता जब अपने प्रतिनिधि को चुनती है तो उसकी आलोचना भी कर सकती है और अगर वे ठीक से काम न करें तो उन्?हें हटा भी सकती है.

यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोटज़् के जस्टिस शशिकांत गुप्ता और पीयूष अग्रवाल की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की. यह मामला बिजनौर के कोतवाली क्षेत्र पंचायत के प्रमुख से जुड़ा हुआ है. पंचायत प्रमुख ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. दरअसल याचिकाकर्ता पंचायत प्रमुख ने 29 जुलाई 2019 को कार्यभार संभाला था. 21 अगस्त 2020 को उनके खिलाफ अविश्वास मत लाया गया. यह उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत औरजिला पंचायत एक्ट 1961 के सेक्शन 15 के अंतर्गत था.

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close