उत्तर प्रदेश

प्रदेश के दस जिलों में पैथॉलजी सेवा सोमवार से ठप होने की कगार पर, पीओसीटी हटाएगा कर्मचारी

लखनऊ

प्रदेश के दस जिलों में पैथॉलजी सेवा सोमवार से ठप होने की कगार पर पहुंच सकती है। क्योंकि यहां इन हाउस पैथॉलजी की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनी पीओसीटी ने अपने कर्मचारियों को हटाने का ऐलान किया है। 24 जनवरी को शासन की ओर से पत्र जारी कर बिना भुगतान के काम कर रहे इन कर्मचारियों को हटाकर अस्पताल के कर्मचारियों से ही काम लेने को कहा गया है। शासन ने कर्मचारियों को हटाने का आदेश तो जारी कर दिया है, लेकिन अब तक उसकी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में 24 घंटे चलने वाली पैथॉलजी सेवा ठप हो सकती है। …क्योंकि अस्पताल में कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं और आउटसोर्सिंग से भर्तियों पर रोक है।

जिन दस जिलों में कर्मचारी हटाए जाएंगे उसमें लखनऊ, आगरा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली, मेरठ मुरादाबाद और गाजियाबाद शामिल है। यहां कंपनी की ओर से लगभग 300 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पूरे प्रदेश में लगभग 1500 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसमें लैब टेक्निशन, सैंपल कैचर और रिपोर्ट बनाने वाले एक्सपर्ट शामिल हैं। लखनऊ में सिविल, बलरामपुर, पीजीआई, केजीएमयू, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय और रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल में कंपनी की ओर से इन हाउस पैथॉलजी सेवा दी जा रही है।

कर्मचारियों के हटने के बाद अस्पतालों की व्यवस्था पटरी से उतर सकती है। इसी को देखते हुए प्रदेश के 69 जिलों से सीएमओ और चिकित्सा अधीक्षकों ने शासन को पत्र लिखा है। इसमें इन कर्मचारियों को हटाने के संबंध में दोबारा से विचार करने को कहा गया है। शासन की ओर से इन कर्मचारियों को कोई भुगतान नहीं किया जाता ऐसे में इनको हटाने पर शासन का कोई फायदा नहीं है। इसी बिना पर सभी सीएमओ ने लिखा है कि जब तक नए पदों का सृजन और नियुक्तियां नहीं होती तब तक कंपनी के कर्मचारियों को कार्यरत रहने दिया जाए। पूरे प्रदेश के सीएमओ के पत्र लिखने के बाद भी 13 मार्च को दोबारा से चिकित्सा महानिदेशक की ओर से अस्पतालों को पत्र जारी किया गया है, जिसमें सभी कर्मचारियों को तत्काल हटाने का आदेश दिया गया है।

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