मध्य प्रदेश

जीवन के सर्वांगीण विकास के लिये खेल महत्वपूर्ण: स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. चौधरी

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी तथा उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी ने टी.टी. नगर स्टेडियम में चार दिवसीय 65वीं राष्ट्रीय शालेय हूपक्वांडो एवं राइफल शूटिंग प्रतियोगिता का शुभारंभ किया

भोपाल: स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी तथा उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी ने टी.टी. नगर स्टेडियम में चार दिवसीय 65वीं राष्ट्रीय शालेय हूपक्वांडो एवं राइफल शूटिंग प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के तत्वाधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में 19 राज्यों एवं 6 इकाईयों के एक हजार 141 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में राइफल ओपन साइड एवं पिस्टल प्रतियोगिताएँ मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग एकादमी गोरेगाँव, भोपाल तथा हूपक्वांडो शासकीय कन्या उ.मा. विद्यालय (बरखेड़ी) जहाँगीराबाद में होंगी।

मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि खेल स्वस्थ जीवन के लिये निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं। हार-जीत से ज्यादा महत्व प्रतियोगिता में सहभागिता का होता है। उन्होंने कहा कि खेल जीवन के सर्वांगीण विकास और चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं। डॉ. चौधरी ने कहा कि अभिभावको को चाहिए कि बच्चों को खेल के लिये प्रोत्साहित करें। खेल के माध्यम से बच्चे देश, प्रदेश एवं परिवार का नाम रोशन कर सकते हैं। आजकल बच्चे खेलों को कैरियर के रूप में अपना रहे हैं। डॉ. चौधरी ने बताया कि स्कूलों में भी र्स्पोट्स एवं योग शिक्षकों की भर्ती की जा रही है ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ खेल एवं योग की शिक्षा भी दी जा सके।

उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि खिलाड़ी जीवन की कठिनाईयों को हमेशा सहजता से निपटाता है, क्योंकि खेल ही हर चुनौती से निपटना सिखाते हैं। खिलाड़ी अपने तन और मन को कड़ी मेहनत से तपाकर तैयार करता है और देश तथा प्रदेश का नाम रोशन करता है। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्कूल स्पोर्ट्स नर्सरी तैयार करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय गेम्स मध्यप्रदेश में भी आयोजित होंगे, इसकी तैयारी की जा रही है।

आयुक्त लोक-शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत ने कहा कि पूरे देश से स्कूली बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग लेने आए हैं। ये सभी बच्चे अपने प्रदेश के हीरे हैं। उन्होंने खिलाड़ी बच्चों से कहा कि प्रतियोगिता में खेल भावना के साथ एकाग्रचित होकर खेलें, अवश्य सफल होंगे। असफलता मिलने पर भी निराश न होते हुए आगे बढते जाना है, यही खेल भावना है।

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