छत्तीसगढ़

वाटर रिचार्जिग हेतु जल संरक्षण एवं सवर्धन संरचना का निर्माण हो: कलेक्टर डाॅ. भारतीदासन

नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के लिए गठित क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर: सरकार की सुराजी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी में से एक जिले मेें स्थित नरवा को पुर्नजीवित किये जाने के लिए गठित क्रियान्वयन समिति की बैठक हुई। कलेक्टर डाॅ. भारतीदासन ने कहा कि लगातार गिरते भू-जल स्तर में कमी लाने के लिए भू-जल संवर्धन एवं संरक्षण का कार्य किया जाना है। सतही जल स्त्रोतों का संरक्षण, संवर्धन तथा नदी नालों को पुर्नजीवित कर ग्रीष्म ऋतु तक जल बहाव की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। इसके लिए जिले के छोटे-बड़े नालोें के उद्गम स्थल के नीचे जहां नदी मिलती है। इस अधारना पर भौगोलिक क्षेत्रों की आवश्यकतानुसार वाटर रिचार्जिग हेतु जल संरक्षण एवं सवर्धन संरचना का निर्माण किया जाना है। निर्मित वाटर रिचार्जिग संरचनाओं के संरक्षण द्वारा क्षेत्र के भू-जल संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। प्रारंभ में जिले के छ नालों को चयनित किया गया है।

बैठक मेें बताया गया कि ऐसे नालों का चयन किया गया है, जो छोटे एवं मध्यम आकार के महानदी, खारून एवं कोल्हान नाले में मिलते है। चयनित नालों के ट्रीटमेंट का कार्य नालों के उदगम स्थल से नीचे की ओर नदी संगम तक प्रस्तावित किया गया है। नाला चयन का संदर्भ बिन्दु नदी से नाले का संगम स्थान है। संगम बिन्दु के आधार पर जल ग्रहण क्षेत्र का निर्धारण किया गया है। नालों को पुर्नजीवन देने के लिए न्युनतम 13 वर्ग किमी. तथा अधिकतम 261 वर्ग किमी. तक कुल 29 वाटरशेड चिन्हांंिकत किये गये है। उन क्षेत्रों के नालों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जहां पेयजल और सिंचाई में कमी हुई है। उन क्षेत्रों के नालों पर विशेष ध्यान दिये जायेगें जहां भू-जल स्तर में लगातार गिरावट हुई है। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ. गौरव कुमार सिंह सहित समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे।

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