छत्तीसगढ़

रायपुर: सरल भाषा में प्रशिक्षण देने से बात अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है: जितेन्द्र शुक्ला

प्रशिक्षण ले रहे ई-एजुकेटर्स का लिया जायेगा ऑनलाइन टेस्ट

रायपुर: राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण (SLMA) के संचालक एवं सदस्य सचिव, प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा और संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् जितेंद्र शुक्ला ने ‘गढ़बों डिजिटल छत्तीसगढ़‘ मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक के अंतर्गत आज तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित ई-एजुकेटर्स से कहा कि प्रशिक्षण सरल भाषा में देने से बात अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण गुणवत्तापूर्ण हो इसके लिए प्रशिक्षण ले रहे ई-एजुकेटर्स का आनलाइन टेस्ट लिया जाएगा। सभी के प्रयास से ‘‘गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़‘‘ कार्यक्रम को देश में अव्वल नंबर का कार्यक्रम बनाना है। ‘‘गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़‘‘ मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम अन्तर्गत छत्तीसगढ़ के रिसोर्स पर्सन व ई-एजुकेटर्स का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 26 से 28 फरवरी 2020 तक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद शंकर नगर रायपुर किया गया हैं।

जितेन्द्र शुक्ला ने कहा कि प्रशिक्षण में उपस्थित सभी प्रतिभागी युवा है, नई पीढ़ी के लोग हैं ऐसे मंच पर सभी का समागम होना अच्छी बात है। खास बात है कि इस सदन में सभी लोग उच्च शिक्षित और डिजिटल साक्षर है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण लेने के बाद हमारा ध्येय लक्षित समूह के अंतिम व्यक्ति तक डिजिटल साक्षरता पहुंचाना हैं। इसके लिए भाषा सहज और सरल होनी चाहिए। लक्षित समूह से सीधे सरल भाषा में संवाद का गुण ई-एजुकेटर्स में होना आवश्यक है। सीखने और सिखाने की कोई उम्र एवं सीमा नहीं होती, यह सभी बन्धनों से परे होता है। भाषा के सरलता और सुगमता के साथ साथ पाठ्यक्रम भी सरल हो ताकि लक्षित समूह को समझने में आसानी हो। ध्यान रखना होगा कि ई-एजुकेटर्स लक्षित समूह को अधिक से अधिक व्यावहारिक शिक्षण उपलब्ध कराने का प्रयास करे। इसके लिए मोर एंड मोर प्रेक्टिस की नीति पर काम करना होगा। प्रशिक्षण के पश्चात् अकादमिक और तकनीकी रूप से आप कितने सक्षम हुए है, इसकी जाँच परीक्षा ऑनलाइन प्रारूप में ली जाएगी, ताकि डिजिटल साक्षरता में आप कितने सक्षम हुए पता चल सके। कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को टीम वर्क की भावना से काम करना होगा। उन्होंने सभी को अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता से करने को कहा।

गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रशांत कुमार पाण्डेय ने तीन दिवसीय कार्यशाला के लक्ष्य, उद्देश्य और रणनीति पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रशांत कुमार पाण्डेय, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक दिनेश टांक, समग्र शिक्षा के सहायक संचालक डॉ. एम. सुधीश सहित डॉ. कामिनी बावनकर, लोकेश कुमार वर्मा, मदनमोहन उपाध्याय, सुश्री तनूजा रायचूरा, यूनिसेफ प्रतिनिधि ऋतुपर्ण चंदा, सीएससी सेंटर के सीनियर मेनेजर जयप्रकाश पटेल, राकेश कुमार कुम्हारे स्त्रोत व्यक्ति, सुश्री मीनाक्षी वाजपेयी, चन्द्रिका प्रसाद वर्मा, अलंकार परिहार, नितिन ठाकुर उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि नवाचारी कार्यक्रम गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ में 15 से 60 आयु समूह के डिजिटल असाक्षरों को प्रशिक्षित ई-एजुकेटर द्वारा एक माह में डिजिटल उपकरणों के उपयोग करना सिखाया जाता है। डिजिटल साक्षरता के अंतर्गत कम्प्यूटर, मोबाइल सहित डिजिटल डिवाइस को चलाना, कम्प्यूटर के पुर्जे का उपयोग, मोबाइल फोन का उपयोग, टेबलेट की जानकारी व उपयोग, इंटरनेट का उपयोग, सर्च इंजन का उपयोग ईमेल का परिचय, सोशल मीडिया, फेसबुक, ट्वीटर, व्हाटसअप का उपयोग। विभिन्न सेवाओं का आनलाइन भुगतान, आनलाइन बुकिंग, रेल, बस टिकिट बुक करना, मोबाइल रिचार्ज, टीवी रिचार्ज, बिजली बिल इत्यादि का भुगतान तथा विभिन्न सेवाओं के लिए आनलाइन फार्म भरना सिखाया जाता है। विषय विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों में पाॅवर पाइंट पे्रजेन्टेशन के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। डिजिटल साक्षरता के अलावा व्यक्तित्व विकास, चुनावी साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, विधिक साक्षरता, श्रेष्ठ पालकत्व, आत्मरक्षा, कौशल विकास, नागरिक कर्त्तव्य, जीवन मूल्य आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।इस बार व्यक्तिगत स्वच्छता व संविधान को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। डिजिटल साक्षरता के कोर्स के के बाद जिले द्वारा आंतरिक मूल्यांकन किया जाता है। तत्पश्चात् छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (Chips) द्वारा आनलाइन बाहय मूल्यांकन किया जाता है। राज्य में अब तक लगभग 7678 शिक्षार्थी सफल हो चुके है।

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