छत्तीसगढ़

भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रसाद योजना में छत्तीसगढ़ का प्रमुख शक्तिपीठ डोंगरगढ़ को शामिल किया गया

छत्तीसगढ़ को देवी-देवताओं का गढ़ कहा जाता है शास़्त्रों के अनुसार जहाँ नारी की पूजा होती है, वही देवता निवास करते है

रायपुर: छत्तीसगढ़ को देवी-देवताओं का गढ़ कहा जाता है। शास़्त्रों के अनुसार जहाँ नारी की पूजा होती है, वही देवता निवास करते है। छत्तीसगढ़ में देवी-शक्ति, देवी आराधना एवं देवी-पूजन की परंपरा अति प्राचीन है। यहाँ के प्राचीन शक्तिपीठों में डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी देवी की शक्तिपीठ को प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में मान्यता है।

भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रसाद योजना में छत्तीसगढ़ का प्रमुख शक्तिपीठ डोंगरगढ़ को शामिल किया गया डोंगरगढ़ में चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि का महत्व:- डोंगरगढ़ एक ऐतिहासिक नगरी है, जहां माँ बम्लेश्वरी के दो विख्यात मंदिर हैं, जो कि एक हजार फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। उत्तुंग चोटी पर स्थित देवी माँ बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है तथा पहाड़ी के नीचे समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से विख्यात है। मां बम्लेश्वरी के मंदिर में प्रतिवर्ष दो बार विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से लाखों दर्शनार्थी आते हैं।

इसके महत्व को देखते हुए भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना के अंतर्गत डोंगरगढ़ को शामिल किया है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के द्वारा डोंगरगढ़ में पर्यटन विकास कार्यो का प्रोजेक्ट भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। डोंगरगढ़ की शक्तिपीठ को भारत के मानचित्र में उचित स्थान दिलाना है जिससे छत्तीसगढ़ के बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित किया जा सके।

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