छत्तीसगढ़

कैट सी.जी. चैप्टर द्वारा व्यापारिक सम्मेलन का आयोजन

रायपुर: कॅान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू , प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र दोषी, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री परमानन्द जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि कॅान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का व्यापारिक सम्मेलन आज होटल आदित्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बी.सी. भरतिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, (कैट) द्वारा दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।

बी.सी. भरतिया, जी द्वारा खुदरा व्यापार में भविष्य की चुुुुनौतियां एवं व्यापारियों की नयी सरकार से उम्मीदें के विषय पर सम्मेलन मे उपस्थित व्यापारीगण को सम्बोधित किया एवं साथ ही सम्मेलन में उपस्थित व्यापारियों के लिए प्रष्नकाल का भी समय सुरक्षित रखा गया था। जिसमें वे अपने व्यापार की जटिलताओं के सम्बंध में श्री भरतिया जी से चर्चा कर उचित मार्गदर्शन लिये ।

इसी कडी में कैट सी.जी. चैप्टर के नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय का उद्घाटन बी. सी. भरतिया जी के द्वारा किया गया। तत्पश्चात भरतिया द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेस में खुदरा व्यापार में भविष्य की चुुुुनौतियां एवं व्यापारियों की नयी सरकार से उम्मीदें के विषय पर पत्रकार बन्धुओं को सम्बोधित किया गया।

खुदरा व्यापार में भविष्य की चुनौतियां
आज हमारे देश में कृषि क्षेत्र के बाद अगर रोजगार की बात करें , तो खुदरा व्यापार ही सबसे बड़ा रोजगार का क्षेत्र है. हमारे देश में खुदरा व्यापार कोई व्यक्ति न करते हुए पूरा परिवार स्वरोजगार पा रहा है. हम यूं कह सकते हैं कि हमारा खुदरा व्यापार इतना अच्छा स्व संचालित है कि दूरदराज के इलाकों तक, आदिवासी इलाकों तक, बारिश के पहले रेनकोट पहुंचेगा , पाठशाला शुरू होने से पहले गणवेश व किताबें पहुंच जाएगी, ठंड आने के पहले गर्म कपड़े पहुंच जाएंगे। हमारे खुदरा व्यापार की वितरण प्रणाली इतनी अच्छी है कि कभी भी, कहीं भी किसी चीज की कमी नहीं होती। इसीलिए हमारे देश में खुदरा व्यापार को अर्थव्यवस्था के रीड की हड्डी कहा जाता है।

खुदरा व्यापार जीवित है, तो देश में अर्थव्यवस्था जीवित है, रोजगार जीवित है और देश विकास और प्रगति की राह पर आगे चल रहा है।

हमारे देश के नीति कार कहीं ना कहीं हमारे पारंपरिक खुदरा व्यवसायियों की मजबूतियो को पहचानने में असमर्थ दिख रहे हैं। हमारे पारंपरिक खुदरा व्यापारियों की शक्तियां, इनका समाज में योगदान, यह सब इनकी शायद समझ के बाहर है। हमारे संविधान में एक सामाजिक व्यवस्था की बात की गई है। मगर ऐसा लगता है कि पूंजीवाद हमारे खुदरा व्यापार में हावी होता जा रहा है। यही चिंता का विषय है।

हमारे देश के खुदरा व्यापार में अनेकों चुनौतियां दिख रही है। आज हमारा खुदरा व्यापार सालाना दो लाख करोड़ से ज्यादा का बाजार है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां, हमारे देश के बड़े घरानों की कंपनियां, इनकी नजर हमारे खुदरा व्यवसाय पर पड़ रही है।

जिस प्रकार के कानून बनते जा रहे हैं, हमारे पारंपरिक व्यवसाई शायद उनका पालन ना कर सके। जिस तरीके से तंत्रज्ञान खुदरा व्यवसाय में हावी हो गया है, जिस तरीके से डिजिटल पेमेंट होते जा रहे हैं, इसका विस्तार होता जा रहा है, क्रेडिट कार्ड पर माल बेचने पर जो बैंक 2ः का चार्ज ले रही है, इन सब से खुदरा व्यवसाय कैसे निपटें ?

बड़ी कंपनियों ने अपना माल ग्राहक तक पहुंचाने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते जा रहे हैं। आज बड़ी कंपनियां बड़े मॉल को रियायती दरों पर माल बेच रही है। ऐसी परिस्थिति में जो पारंपरिक व्यवसाई है यह बड़े लोगों से मुकाबला कैसे कर पाएंगे। बड़ी कंपनियां बड़े-बड़े विज्ञापन और ब्रांडों के द्वारा ग्राहकों को भ्रमित कर रही है। कई जगह यह भी देखा गया है की बड़ी पैकिंग की कीमतें ज्यादा रखकर वहां डिस्काउंट बताते हुए ग्राहक को महंगा माल बेच रही है। अगर उदाहरण दें तो 10 ग्राम की वस्तु की कीमत अगर ₹10 है तो उसी वस्तु की 75 ग्राम की पैकींग की कीमत यह ₹125 लिख देते हैं और 25 डिस्काउंट बता ग्राहक को 100 में बेच देते हैं। ग्राहक भ्रमित है, उसे लग रहा है कि उसे माल सस्ता मिल रहा है मगर वास्तु स्थिति ऐसी नहीं।

इसी प्रकार जीएसटी व अन्य कानून इतना पेचीदा बना दिया है कि व्यापारी के लिए व्यापार करने के लिए समय का अभाव हो रहा है।

बैंकिंग प्रणाली आज पारंपरिक व्यवसायों को उनके लिए जरूरत जितना कर्ज उपलब्ध नहीं करा पा रहे। रोज बाजार में नए माल आ रहे हैं । मार्लों की कीमत बढ़ती जा रही है। ऐसी परिस्थिति में अगर पर्याप्त पूंजी व्यवसायियों के पास नहीं रही तो वे माल का स्टॉक कैसे रख पाएंगे। अपने आप ग्राहक उनसे दूर होते चले जाएंगे।

आज इंस्पेक्टर राज अपनी जड़े मजबूत कर रहा है। व्यवसाय करने का खर्च बढ़ता जा रहा है। बैंकों में कितने प्रकार के चार्जिस लग गए हैं की बैंकिंग करने का खर्च बढ़ता जा रहा है। दुकानों का किराया महंगा हो गया। बिजली महंगी हो गई। ऐसी परिस्थिति में थोड़ा सा मुनाफा रखकर व्यवसाय करना असंभव होता जा रहा है।

आज हमारे बाजार में जो मूलभूत सुविधाएं हैं चाहे अच्छी सड़क हो, सुगम यातायात हो, शौचालय हो, जानवरों का बसेरा ना हो आदि सारे विषय स्थानीय निकायों की जवाबदारी है। क्या यह जवाबदारी पूरी हो रही है। सरकारी तंत्र अपना कार्य कर रहा है। अगर बाजार अच्छा ना रहा तो ग्राहक बाजार में आने से अपने आप को रोकता है फिर तकलीफ आएगी इस ओर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। खुदरा व्यापार जीवित है, तो देश में अर्थव्यवस्था जीवित है, रोजगार जीवित है और देश विकास और प्रगति की राह पर आगे चल रहा है।

हमारे देश के नीति कार कहीं ना कहीं हमारे पारंपरिक खुदरा व्यवसायियों की मजबूतियो को पहचानने में असमर्थ दिख रहे हैं। हमारे पारंपरिक खुदरा व्यापारियों की शक्तियां, इनका समाज में योगदान, यह सब इनकी शायद समझ के बाहर है। हमारे संविधान में एक सामाजिक व्यवस्था की बात की गई है। मगर ऐसा लगता है कि पूंजीवाद हमारे खुदरा व्यापार में हावी होता जा रहा है। यही चिंता का विषय है।

व्यापारियां की नई सरकार से उम्मीदें :

1. एक बेहतर ई-कॉमर्स पॉलिसी घोषित हो जो वर्तमान में हो रहे विषाक्त ई-कॉमर्स व्यापार को साफ करने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा क़ायम कर सके।

2. रीटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति बनाया जाये।

3. केंद्र में पृथक रूप से एक आंतरिक व्यापार मंत्रालय का गठन हो।

4. एक रीटेल रेग्युलटॉरी अथॉरिटी का गठन एवं ई कामर्स के लिए एक रेग्युलटॉरी अथॉरिटी का गठन किया जाये।

5. जीएसटी कर ढाँचे का सरलीकरण हो।

6. देश के वर्तमान रीटेल व्यापार के ढाँचे को आधुनिक बनाने के लिए एक ठोस योजना बनाई जाए।

7. मुद्रा योजना में व्यापारियों को आसानी से कर्ज मिल सके इस हेतु नान बैंकिंग फ़ाइनैन्स कम्पनी एवं माइक्रो फाईनेन्स इंस्टिट्यूशन को जोड़ा जाना चाहिए।

8. एक नेशनल बोर्ड फॉर इंटर्नल ट्रेड की स्थापाना की जानी चाहिए।

9. जीएसटी में पंजीकृत प्रत्येक व्यापारी को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर 10 लाख का दुर्घटना बीमा दी
जानी चाहिए।

10. कम्प्यूटर खरीदने पर व्यापारियों को सब्सिडी दी जानी चाहिए।

11. बैंकों द्वारा व्यापारियों को दिए जाने वाले कर्ज पर चालू ब्याज दर पर 2 प्रतिषत की रियायत दी
जानी चाहिए।

12. व्यापारियों को मिलने वाले कर्ज को दोबारा परिभाषित किया जाए।

13. बाजारों में ढाँचागत सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए।

14. व्यापारियों एवं बाजारों की व्यापक सुरक्षा प्रदान किया जाना चाहिए।

15. फ़ूड ग्रेन और आवश्यक वस्तुओं को वायदा बाज़ार से बाहर रखा जाना चाहिए।

16. देश भर से मंडी टैक्स एवं प्रोफेषनल टैक्स समाप्त कर जीएसटी में समाहित किया जाना चाहिए।

17. प्रत्येक व्यापार के लिए केवल एक लाइसेन्स लेने की व्यवस्था होनी चाहिए।

18. ग्राम पंचायत से लेकर विधान परिषद में अन्य वर्गों की तरह प्रतिनिधितिव करने व्यापारियों को शामिल किया जाना चाहिए।

उपरोक्त कार्यक्रम में कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कैट सी.जी. चैप्टर के पदाधिकारी, प्रदेश के व्यापारी संगठनों के अध्यक्ष एवं प्रदेश के व्यापारीगण बडी संख्या में उपस्थित रहे।

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