छत्तीसगढ़

नेशनल ‘लोक अदालत‘ का आयोजन 14 सितम्बर को

नेशनल लोक अदालत का आयोजन शनिवार 14 सितम्बर को किया जा रहा है

रायपुर: नेशनल लोक अदालत का आयोजन शनिवार 14 सितम्बर को किया जा रहा है। इस नेशनल लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकरण, व्यवहार प्रकरण, चेकों के अनादरण संबंधी प्रकरण, बैंक वसूली के प्रकरण, दावा प्रकरण, पारिवारिक प्रकरण, श्रम विवाद प्रकरण, भू-अर्जन संबंधी प्रकरण, बिजली एवं पानी के भुगतान संबंधी प्रकरण एवं अन्य लंबित एवं विवाद पूर्व प्रकरण (प्री-लिटिगेशन) का निराकरण किया जाना है। 14 सितम्बर, 2019 को आयोजित ‘‘नेशनल लोक अदालत’’ की तैयारियों के अन्तर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, द्वारा पक्षकारों के मध्य सुलह द्वारा विवादों के समाधान के लिए माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीशगण की खण्डपीठ एवं परिवार न्यायालय की खण्डपीठ, स्थायी लोक अदालत की खण्डपीठ, श्रम न्यायालय की खण्डपीठ गठित की गई है।

इस ‘‘नेशनल लोक अदालत’’ में व्यवहार न्यायालय, दांडिक न्यायालय, परिवार न्यायालय, सभी विशेष न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत लंबित प्रकरण तथा प्री-लिटिगेशन से संबंधित प्रकरण रखे जाने हैं। जिन पक्षकारों के लंबित मामलें आयोजित नेशनल लोक अदालत में नहीं रखे जा सकें हैं यदि वे अपने मामलों को सुलह समझौता के आधार पर निराकृत कराना चाहते हैं तो वे स्वतः उपस्थित होकर अपने मामलों को आयोजित नेशनल लोक अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर अपने प्रकरण को निराकृत करवा सकते हैं।

लोक अदालत लोगों को शीघ्र एवं सस्ता न्याय सुलभ कराने का एक सशक्त माध्यम तथा विवादों को आपसी समझौते के द्वारा सुलझाने के लिये एक वैकल्पिक मंच है। लोक अदालत में न्यायालय में लंबित या विवाद पूर्व प्रकरणों का आपसी समझाईश एवं सुलह के आधार पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में निराकरण कराया जाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि नेशनल लोक अदालत में समझौता के माध्यम से प्रकरण के निराकरण में विवाद का अंत हो जाता है जिससे समय एवं धन की बचत होती है। न्यायालयों में प्रकरण के निराकरण पश्चात् भी मामलों का पूर्णतया अंत नहीं हो पाता जबकि लोक अदालत के माध्यम से निराकृत प्रकरणों का पूर्णतया अंत हो जाता है। लोक अदालत की प्रक्रिया बेहद सरल एवं सस्ती है। लोक अदालतों के माध्यम से मामले अंतिम रूप से निराकरण होते हैं। लोक अदालत से निराकृत मामलों में कोई अपील नहीं होती है तथा पक्षकारों द्वारा दिये गये न्याय शुल्क भी वापस किये जाते हैं।

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