छत्तीसगढ़

रायपुर: नन्हे महेश को कुपोषण से मिली मुक्ति, खिले माता पिता के चेहरे

रायपुर: उचित देखभाल और समुचित पोषण मिलने से 10 माह के नन्हे बालक महेश सारथी का वजन बढ़ गया है और उसके चेहरे पर रौनक आ गई है। जशपुर जिले के गाला गांव के निवासी दिवाकर सारथी और श्रीमती पुष्पा सारथी का पुत्र बालक महेश जन्म के समय से ही कमजोर था। महेश के जन्म के समय घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन उसके कम वजन से सभी चिंतित थे। नन्हे महेश के चेहरे पर न चमक थी न शरीर में चपलता।

मुख्यमंत्री के प्रदेश से कुपोषण मुक्ति के अभियान मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के शुरू होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कुपोषित बच्चों को विशेष रूप से पूरी जागरूकता और सतर्कता से चिन्हांकित किया जा रहा है। इसी कड़ी में महेश के जन्म पश्चात ग्राम पंचायत गाला में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र सुकबासुपारा की कार्यकर्ता श्रीमती सुलोचना यादव उसके घर गृह भेंट हेतु गयी। श्रीमती यादव को महेश देखने से ही कमजोर लगा। कार्यकर्ता ने उसका वजन लिया जिससे पता चला की महेश का वजन सिर्फ 1.700 किलोग्राम है। महेश की उम्र के अनुसार उसका वजन बहुत कम था, और यह गंभीर कुपोषित की श्रेणी में आता है। इसे देखते हुए कार्यकर्ता ने बच्चे की मां श्रीमती पुष्पा सारथी को 06 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने की सलाह दी। कार्यकर्ता ने श्रीमती सारथी कोे बच्चे को अतिरिक्त गर्माहट प्रदान करने हेतु कंगारू मदर केयर के बारे में विस्तार से बताया।

नन्हे महेश के घर निरंतर कार्यकर्ता के द्वारा गृहभेंट कर बच्चे की साफ सफाई और मां-बेटे के समुचित पोषण की निगरानी रखी गयी। दूसरे माह में बच्चे का वजन लिया गया जिसमें बच्चे का वजन बढ़कर 3.400 किलोग्राम हो गया तथा तीसरे माह में बच्चे का वजन 5.140 किलोग्राम हो गया। निरंतर गृहभेंट एवं पालकों को समझाईश काम आई और महेश गंभीर कुपोषित से सामन्य श्रेणी में आ गया। बच्चे महेश के 06 माह पूर्ण होने पर आंगनबाड़ी में सुपोषण चैपाल के दौरान उसका अन्नप्राशन कराया गया तथा बच्चे के माता-पिता को ऊपरी आहार के सम्बंध में सलाह दी गई। आंगनबाड़ी के माध्यम से बच्चे में आए सुखद बदलाव को देखकर अब माता पिता भी खुश हैं।

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