छत्तीसगढ़

प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन 20 से 22 सितम्बर 2019

छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे वन, खनिज संपदा, जलसंसाधन, कृषि संपदा आदि से परिपूर्ण है

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे वन, खनिज संपदा, जलसंसाधन, कृषि संपदा आदि से परिपूर्ण है। राज्य को तीन कृषि जलवायु क्षेत्रों यथा छत्तीगसढ़ का मैदानी भाग, बस्तर का पठार एवं उत्तर का पहाड़ी क्षेत्र में बांटा गया है। उक्त तीनों क्षेत्रों में जलवायु एवं प्राकृतिक संपदा अलग-अलग होने के कारण जैव विविधता प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है तथा राज्य में विविध प्रकार के कृषि एवं उद्यानिकी फसलों का उत्पादन किया जाता है। राज्य में कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है। उक्त क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वनोपज तथा औषधीय व सुंगधित पौधे का व्यापक उत्पादन होता है। छ.ग. राज्य धान के कटोरा के नाम से प्रसिद्ध है तथा राज्य में धान के धान के विभिन्न गुणों वाले लगभग 23000 किस्मों का जर्मप्लास्म संरक्षित है।

राज्य के विभिन्न कृषि उत्पादों ने भी अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है, जिसमें मुख्य रूप से धान, लाल चावल, काला चावल, आर्गेनिक विष्णुभोग चांवल, अन्य सुगंधित धान की पारंपरिक किस्में व कोदो, कुटकी, रागी, जैसे पारंपरिक एवं बहूमूल्य कृषि उत्पाद तथा मक्का, मखाना, चना, लाल मसूर, सोयाबीन, रामतिल, तिल, फल-सब्जी जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी, बैगन, हरा मटर, शिमला मिर्च, टमाटर, गवारफल्ली, मूली, अदरक, हरी मिर्च, हल्दी, पपीता, सीताफल, लिची, ड्रैगनफु्रट, आंवला, कटहल, केला, नासपत्ती, एप्पल बेर, बेल, काजू, नींबू, गेंदा तथा ग्लेडिलस का उत्पादन, किया जा रहा है। इस क्षेत्र में विपणन, प्रसंस्करण तथा निर्यात की सम्भावनाओं को बढ़ाने की आवश्यकता है।

वनांचल क्षेत्र में वृहद मात्रा में विभिन्न वनोपज का संग्रहण कर विक्रय की जाती है। विगत कुछ वर्षों से राज्य शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज संघ द्वारा वनोपज क्रयण किया जा रहा है। वनोपज के अंतर्गत मुख्य रूप से महुआ, महुआ बीज, इमली, साल बीज, औषधीय पौधे जैसे कालमेघ, बेहड़ा, हर्रा, चारगुठली, गोंद, लाख, नागरमोथा, शहद, त्रिफला, अश्वगंधा, सफेद मूसली आदि का संग्रहण एवं विक्रय किया जा रहा है।

राज्य सरकार द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य के पांच जिलों दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, बीजापुर, एवं गरियाबंद को पूर्ण जैविक तथा 22 जिलों के एक एक विकासखण्ड को जैविक विकासखण्ड घोषित किया गया है। इससे निश्चित रूप से वनांचल क्षेत्र में जैविक खेती को बढावा मिलेगा एवं कृषक उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते है।

राज्य में उपलब्ध विशेष गुणो से भरपुर फसलों अनाज, दलहन, तिलहन, वनोपज, साग सब्जी तथा हैण्डलूूम, कोसा, सिल्क इत्यादि उत्पादों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 20 सितंबर से 22 सितंबर 2019 के मध्य रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेताओं का सम्मेलन का आयोजन छ.ग. राज्य कृषि उपज मंडी द्वारा किया जा रहा है। इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के कृषि उपज, वनोपज, हैण्डलूम कोसा इत्यादि उत्पादों के प्रोत्साहन एवं विक्रय को बढ़ावा देने हेतु 16 देशों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लगभग 60 क्रेता एवं देश के अन्य प्रदेशो से लगभग 60 क्रेताओं तथा प्रदेश से लगभग 120 विक्रेताओं के भाग लेने की संभावना है।

उक्त सम्मेलन में व्यापार तथा क्रियाशीलता, छत्तीसगढ़ के उत्पाद की ब्रांडिंग तथा अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है। इस सम्मेलन के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसानों, बुनकर एवं वनोपज संग्रहण से जुड़े क्रेता विक्रेता के साथ विस्तृत चर्चा होगी तथा स्वसहायता समुह, थ्च्व् द्वारा अपने उत्पाद का प्रदर्शन के साथ-साथ विक्रय किया जाएगा। इस सम्मेलन में स्थानीय कृषकों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय क्रेताओं से सीधे बातचीत कर व्यापार करने का अवसर प्राप्त होगा, जिसके फलस्वरुप उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा एवं बिचौलियों से बचा जा सकेगा।

20 और 21 सितम्बर 2019 को आमंत्रित क्रेता एवं विक्रेता के बीच चर्चा, अनुबंध, एमओयू इत्यादि संपन्न होंगे तथा 22 सितम्बर को सामान्य जनमानस के लिए प्रदर्शन के अवलोकन तथा क्रय विक्रय के हेतु खुला रहेगें।

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