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इस्‍लामिक सहयोग संगठन ने अमरीकी राष्‍ट्रपति की शांति योजना नामंजूर की

इस्‍लामिक सहयोग संगठन ने अमरीकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प की शांति योजना को नामंजूर कर दिया है। इससे पहले अरब लीग ने भी इसे फलस्‍तीन के लिए अनुचित बताते हुए अस्‍वीकार किया था। इस्‍लामिक संगठन ने अपने सदस्‍य देशों से कहा है कि वे यह कार्यक्रम लागू करने में अमरीका को सहयोग न दें।

जेद्दा में एक बैठक में पैन इस्‍लामिक संगठन ने सभी सदस्‍य देशों से इस योजना को लागू न करने को कहा। इस्‍लामिक सहयोग संगठन-ओआईसी की विज्ञप्ति में कहा गया है कि वह अमरीकी इस्राइली योजना को नामंजूर करता है क्‍योंकि यह फलिस्‍तीनी लोगों के वैध अधिकारों और न्‍यूनतम आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं करता और शांति प्रक्रिया की शर्तों का खंडन करता है।

ओआईसी ने अपने अरब और इस्लामी चरित्र पर बल देते हुए, भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में पूर्वी यरूशलेम के लिए अपना समर्थन दोहराया। बयान में आगे कहा गया है कि शांति तभी आ सकती है जब इस्राइल जून 1967 के बाद से फलिस्‍तीन विशेष रूप से अल-कुद्स अल-शरीफ (यरूशलेम) के पवित्र शहर और अन्य अरब क्षेत्रों पर किया गया कब्‍जा छोड़ दे।

पश्चिम एशिया के लिए अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की शांति योजना में कहा गया है इजरायल फलिस्‍तीन में अविभाजित राजधानी के रूप में विवादित शहर येरूशलम और फिलीस्तीनी भूमि की बस्तियों पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।

ओआईसी में 57 सदस्य देश हैं और ये दुनिया भर में एक अरब पचास करोड़ मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ईरान अमेरिकी शांति योजना की पहले ही निंदा कर चुका है।

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