विदेश

चीन ने दिखाई चालाकी, UNSC में आज सुबह 10 बजे बंद कमरे में कश्मीर पर होगी चर्चा

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के बाद भारत से ज्यादा विरोध पाकिस्तान में हो रहा है

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के बाद भारत से ज्यादा विरोध पाकिस्तान में हो रहा है। पाकिस्तान इस संबंध में भारत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की लगातार मिन्नत के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) शुक्रवार को कश्मीर मुद्दे पर एक क्लोज डोर बैठक करने जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) अब शुक्रवार को कश्मीर मसले पर एक क्लोज डोर बैठक करने जा रही है। क्लोज डोर बैठक में भारत की ओर से इसी महीने के पहले हफ्ते (5 अगस्त) में अपने संविधान से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने को लेकर चर्चा की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जोआना रेकोनाका ने पत्रकारों से बुधवार को कहा कि वह बंद दरवाजों के पीछे जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर 16 अगस्त को चर्चा करेंगे।

यह खबर तब सामने आई है, जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मंगलवार रात कहा था कि उन्होंने कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा है। पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने कश्मीर मसले पर पत्र लिखते हुए अनुरोध किया था कि इस मामले पर तुरंत एक आपातकालिक बैठक बुलाई जाए।

वहीं पाकिस्तान के दोस्त चीन ने भी उसकी यह बात मानते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से बैठक बुलाने की मांग की। बैठक में चीन ने जम्मू-कश्मीर मसले पर पाकिस्तान की शिकायतों को सुनी जाने की बात कही है। चीन की तरफ से आधिकारिक तौर पर पोलैंड को यह खत लिखा गया है।

यूएनएससी में पोलैंड अगस्त महीने का काउंसिल चेयरमैन है, इसलिए किसी भी बैठक को बुलाने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा कि यदि भारत इसी तरह आक्रामक रुख बनाए रखता है तो पाकिस्तान चुप नहीं बैठेगा।

अनुच्छेद 370 पर फैसले के बाद हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी चीन गए थे, जहां उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग ली के साथ द्विपक्षीय वार्ता करते हुए जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति साफ की थी। जयशंकर ने तब साफ कहा था कि भारत ने जो फैसला लिया है वह उसका आंतरिक मामला है और इससे ना चीन-ना पाकिस्तान किसी की सीमा पर असर पड़ता है तब चीन ने भी ऐसी ही हामी भरी। हालांकि अब चीन पलटते हुए यूएनएससी में मसले पर चर्चा के लिए पत्र लिख डाला।

इससे पहले शाह महमूद कुरैशी ने स्वीकार किया था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ मुहिम चलाने में उसे कामयाबी नहीं मिल रही। बकरीद के मौके पर पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में कुरैशी ने कहा था कि हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए। पाकिस्तानी और कश्मीरियों को यह जानना चाहिए कि कोई आपके लिए नहीं खड़ा है आपको जद्दोजहद का आगाज करना होगा।

बकरीद पर पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में कोई भी हार लेकर नहीं खड़ा है, हमें इसके लिए संघर्ष करना होगा. यूएनएससी के 5 स्थायी सदस्यों में से एक भी हमारे खिलाफ जा सकता है।

पाकिस्तान की ओर से चीन से लेकर अमेरिका तक इस मसले पर अपने पक्ष में करने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी नहीं सुनी गई. पाकिस्तान ने अपने करीबी दोस्त चीन से भी गुहार लगाई और वहां भी निराशा ही हाथ लगी।

अमेरिका ने भी इस मसले पर साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर का मसला द्विपक्षीय मसला है और अमेरिका इसमें मध्यस्थता नहीं करने जा रहा। साथ ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को अमेरिका ने भारत का आंतरिक मामला करार दिया।

पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी गया यह कहते हुए कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन किया है। लेकिन उसे वहां से भी बेरंग लौटना पड़ा, क्योंकि यूएनएससी ने इस फैसले को भारत का आंतरिक मसला बताया।

सिर्फ यही नहीं मुस्लिम देशों के संगठन आईओसी (OIC) ने भी जम्मू-कश्मीर के मसलों को आंतरिक मामला बताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि दुनिया को यह स्थिति समझाना आसान नहीं है, क्योंकि कई देशों के भारत में निवेश हैं। इसलिए कश्मीर और पाकिस्तान के लोग इस मिशन को आसान ना समझें।

अब तक हर ओर से पाकिस्तान को कश्मीर मसले पर भारत को चुनौती देने की रणनीति नाकाम हुई है। अब यूएनएससी की क्लोज डोर बैठक में कश्मीर मसला पर चर्चा होने जा रही है, लेकिन अब तक जिस तरह से वैश्विक प्रतिक्रिया सामने आई है और भारत ने संविधान के दायरे में काम किया है, ऐसे में लगता है कि पाकिस्तान को यहां भी मुंह की खानी पड़ेगी।

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