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अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से समर्थन प्राप्‍त करने में विफल होने के बाद, पाकिस्‍तान हताशा का शिकार

पाकिस्‍तानी सरकार को फटकारते हुए अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद को सहायता और बढावा देने में उसकी भूमिका की कड़ी आलोचना की

अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से समर्थन प्राप्‍त करने में विफल होने के बाद, पाकिस्‍तान हताशा का शिकार हो गया है। पाकिस्‍तानी सरकार को फटकारते हुए अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद को सहायता और बढावा देने में उसकी भूमिका की कड़ी आलोचना की है। दुनिया ने यह भी स्‍पष्‍ट कर दिया है कि जम्‍मू-कश्‍मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और पाकिस्‍तान को चाहिए की वो अपनी धरती से चल रही आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के उपाय करे।

अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय ने भी पाकिस्‍तान को मज़बूर किया कि वो भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से भारतीय राजनयिक को मिलने की अनुमति दे। जाधव को पाकिस्‍तान ने जासूसी के झूठे मामलों में अभियुक्‍त बनाया है। कुलभूषण को म‍हीनों जेल में रखने के बाद भारतीय राजनयिक को हाल में उससे मिलने की अनुमति दी गई, लेकिन उसका यह दिखावा उस समय स्‍पष्‍ट हो गया जब पाकिस्‍तानी एजेंसियों ने जाधव को उनके रटे-रटाए रूख पर ही बोलने पर मज़बूर किया।

यूरोपीय संघ ने भी स्‍पष्‍ट कर दिया है की यह भारत और पाकिस्‍तान पर निर्भर है कि वे मुद्दे का समाधान आपसी बातचीत से करें। साथ ही उन्‍होंने ढके-छुपे शब्‍दों में पाकिस्‍तान को सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए भी कहा है।

इसके बाद माले में दक्षिण एशिया संसद अध्‍यक्षों की शिखर बैठक हुई। इसमें सतत विकास लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए विचार-विमर्श किया जाना था। इसमें भी पाकिस्‍तान ने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की। लेकिन भारत की राज्‍य सभा के उप-सभापति ने भारत के अंदरूनी मामले को उठाने पर कड़ी आपत्ति व्‍यक्‍त की और इस मंच को राजनीतिक रंग देने के पाकिस्‍तान की कोशिश को खारिज़ कर दिया। उनका कहना था कि शिखर बैठक में निर्धारित मुद्दों से अलग कोई मुद्दा उठाना उचित नहीं था। उन्‍होंने पाकिस्‍तान से कहा कि वो सीमा पार आतंकवाद को रोके और आतंकवादियों को सरकारी समर्थन बंद करे। माले घोषणा में भी आंतकवाद समाप्‍त करने का आह्वान किया गया।

हाल ही में कोलम्‍बो में आयोजित यूनीसेफ दक्षिण एशियाई संसदीय सम्‍मेलन में भी भारत के प्रतिनिधि और सांसद गौरव गोगोई तथा संजय जैसवाल ने पाकिस्‍तान की कड़ी आलोचना की और स्‍पष्‍ट रूप से कहा कि पाकिस्‍तान को आतंकवाद को बढावा देने के अपने लम्‍बे रिकॉर्ड को स्‍वीकार करना चाहिए।

अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की और से किसी प्रकार का समर्थन जुटाने में विफल पाकिस्‍तान ने लंदन में भारतीय उच्‍च आयोग पर ब्रिटेन में रह रहे पाकिस्‍तानियों से हमला करवा दिया। हमलावरों ने भारतीय उच्‍च आयोग की खिड़कियां तोड दीं और परिसर के निकट जबर्दस्‍त हंगामा किया। एक महीने के भीतर यह दूसरी घटना है, जब उग्र पाकिस्‍तानी प्रदर्शनकारियों ने लंदन स्थित भारतीय उच्‍च आयोग को निशाना बनाया है।

भारत ने इस घटना पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की है। इस बारे में प्रश्‍नों का उत्‍तर देते हुए सरकारी प्रवक्‍ता ने कहा कि इससे लंदन स्थित भारतीय मिशन की सुरक्षा और सामान्‍य कामकाज़ प्रभावित हुआ।

प्रवक्‍ता ने कहा कि भारत इन घटनाओं को कदापि स्‍वीकार नहीं करता और ब्रिटेन सरकार से आग्रह करता है कि वो इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवश्‍यक कार्रवाई करे ताकि मिशन का कामकाज़ सामान्‍य रूप से चलता रहे तथा उसमें कार्यरत लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

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