स्वास्थ

हीपा फिल्टर एवं ग्लास क्यूबिकल के साथ अत्याधिनक उपकरणों से संक्रमण रहित माहौल में मरीजों का इलाज

प्लास्टिक सर्जरी डे-15 को

रायपुर: 15 जुलाई को पूरे विश्व में प्लास्टिक सर्जरी डे मनाया जाता है. छत्तीसगढ़ में भी गिने-चुने ही प्लास्टिक सर्जन मौजूद है. इसमें से एक है ओम हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ कमलेश अग्रवाल, जिन्होंने अपनी इस विशेषज्ञता से पिछले 12 वर्षों में मरीजों का बेहतर इलाज कर अपने इस प्रोफेशन में अहम योगदान दिया है. उनके इस कठिन परिश्रम का ही नतीजा है कि फैक्ट्री में आए दिन होने वाले हादसों के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक अपने इलाज के लिए अब ओम हॉस्पिटल को ही अपनी पहली प्राथमिकता दे रहे है. इसकी प्रमुख वजह हैं वहां का उच्च तकनीक से लैस आईसीयू. अस्पताल के डॉयरेक्टर और बर्न एंड प्लास्टिक सर्जन विशेषज्ञ डॉ कमलेश अग्रवाल बताते है कि अस्पाल में जले मरीजों के इलाज के लिए सुपर बर्न आईसीयू है, जिसमें हीपा फिल्टर एवं ग्लास क्यूबिकल के साथ अत्याधिनक उपकरणों से संक्रमण रहित माहौल में मरीजों का इलाज किया जाता है. इतना ही नहीं हर आईसीयू में इलाज करने वाले मेडिकल स्टॉफ की एक अलग टीम है, जिससे मरीजों को किसी भी प्रकार का संक्रमण का कोई भी खतरा नहीं होता. इतना ही नहीं बर्न मरीजों को अस्पताल में आरओ वाटर से नहलाया जाता है, क्योंकि पानी से भी जले मरीजों में संक्रमण का काफी खतरा रहता है. अस्पताल में 32 बैड का बर्न ट्रामा यूनिट है, जहां मरीज के प्रारंभिक इलाज के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की टीम मौजूद है. इस टीम में प्रमुख रूप से डॉ विजय अग्रवाल (डॉयरेक्टर एवं प्रमुख मैक्सिलो सर्जरी विभाग), डॉ प्रकाश अग्रवाल (प्रमुख हड्डी रोग विभाग), डॉ जैन ( प्रमुख न्यूरो सर्जरी विभाग), डॉ नरसिंह (जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन) इत्यादि मौजूद है. इसके अलावा ओम हॉस्पिटल के गहन चिकित्सा विभाग में डॉ ओमप्रकाश (एनस्थेटिक एवं इंटेंसिविस्ट), डॉ योगेश (एमडी मेडिसिन) और डॉ श्रीकांत (एमडी पीडियाट्रिक) मौजूद है. चूंकि ओम हॉस्पिटल महादेवघाट रोड स्थित मेन रोड में ही मौजूद है और यहां राजधानी के अलावा महानगरों के अस्पतालों में मौजूद इलाज से काफी रियायती दरों पर मरीजों का इलाज होता है इसलिए न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि मध्यप्रदेश और ओड़िशा से भी यहां मरीज अपना इलाज करने पहुंच रहे है.

क्या है प्लास्टिक सर्जरी

प्लास्टिक सर्जरी जन्मजात या चोट (जलने, दुर्घटना, युद्ध आदि) या किसी सर्जरी की वजह से विकृति और फंक्शन में नुकसान से पीड़ित लोगों के जीवन को सरल बनाने की कोशिश करती है. प्लास्टिक सर्जरी बॉडी के किसी विशेष अंग तंत्र से जुड़ी हुई नहीं है. प्लास्टिक सर्जन सिर से लेकर पैर तक शरीर के हर कोने में सर्जरी करते हैं. हालांकि प्लास्टिक सर्जरी के दो प्रमुख क्षेत्र एस्थेटिक या कॉस्मेटिक सर्जरी और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी हैं. कॉस्मेटिक या एस्थेटिक सर्जरी आमतौर पर शरीर के दाग, धब्बे, झुर्रियां, कोई विकृ़ति, या सुंदरता निखारने के लिए की जाती है. डॉ कमलेश अग्रवाल कहते है कि प्लास्टि सर्जरी करने वाले सर्जन हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चोट के बाद अपना अहम योगान देते है, क्योंकि चोट के बाद घाव कैसे जल्द भरा जाए और चोट की वजह से शरीर के बाहरी हिस्से में कोई भी दाग-धब्बा न रहे इस काम में उन्हें महारत हासिल होती है. यही कारण है कि किसी भी प्रकार की चोट लगने पर एक बार इससे जुड़े विशेषज्ञों से जरूर मरीज को संपर्क करना चाहिए.

प्लास्टिक सर्जरी में नया क्या है

इस श्रृंखला में नवीनतम है हैंड ट्रांसप्लांट और फेस ट्रांसप्लांट. संतोशजनक बात यह है कि ये सभी प्लास्टिक सर्जरी छोटी (नर्व प्लास्टी के मरीज के लिए टेंडन ट्रांसफर) या बेहद परिष्कृत (जैसे कि फेस ट्रांसप्लांट) होती हैं. बर्न मैनेजमेंट यानी आग से जलने, बिजली से जलने और एसिड से जलने व इसके परिणामस्वरूप होने वाली विकृतियों को सही करने के लिए इन विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है. जन्म से कटे होंठ या कटे तालू की विकृति (क्रानियोफेसियल क्लीफ्ट्स) को सही करने के लिए स्माइल ट्रेन के सौजन्य से मरीजों का मुफ्त में इलाज किया जा रहा है. हालांकि कई अन्य जन्मजात दोषों जैसे हाथ की विकृति, चेहरे की विकृति (क्रानियोसिनेस्टोसिस), बाहरी यूरिनरी/जननांग प्रणाली की विकृति (हाइपोस्पेडिया) के निदान और समय पर प्रबंधन के लिए प्लास्टिक सर्जरी विषेशज्ञता प्रदान करने के लिए और अधिक प्रयास किए जा रहे है जिससे मरीजों को काफी फायदा हो रहा है और प्रदेश वासियों के लिए अच्छी बात ये है कि उन्हें ये सभी सर्जरी का लाभ प्रदेश की राजधानी स्थित ओम हस्पिटल में एक ही छत के नीचे मिल रही है.

खूबसूरती बढ़ाने में भी कारगर

इनके अलावा प्लास्टिक सर्जरी की दुनिया ग्लैमर और चमक-दमक से कहीं बढ़कर है. मोटापा कम करने के लिए और हेयर ट्रांस्प्लांट से लेकर एंटी-ऐजिंग सर्जरी और चेहरे तथा शरीर को खूबसूरत बनाने की काफी मांग है. वजन में अत्यधिक कमी के बाद (बैरिएट्रिक बॉडी समरूपन के बाद) शरीर को समरूप बनाना प्लास्टिक सर्जरी में नई विधा है. औैर रीजेनरेटिव मेडिसिन अभी भी नई है जिसमें प्लास्टिक सर्जन्स जीवन चक्र को पलटने में सक्षम हो सकते हैं. वैसे भी, प्लास्टिक सर्जरी आवश्यक है और संपूर्ण समाज को समृद्ध कर रही है.

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