स्वास्थ

रायपुर: NHMMI में जटिल हृदय रोग से पीड़ित 7 वर्षीय बच्ची का सफलतापूर्वक ऑपरेशन

यह केस राज्य का पहला केस है जिसमें मात्र 12 कि.ग्रा. वजनी बच्ची के हृदय के उपरी हिस्से में एक पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया

रायपुर: नारायणा हेल्थ बैंगलोर की रायपुर स्थित यूनिट एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा जटिल जन्मजात हृदयरोग से पीड़ित एक 7 वर्षीय बच्ची का ए.ए.आई. (एट्रियल पेसिंग मोड) पेसमेकर इम्प्लांट सफलतापूर्वक किया गया। यह बच्ची पीएवीसीडी (पार्शियल ए वी कैनाल डिफेक्ट) नामक एक दुर्लभ जन्मजात हृदयरोग से पीड़ित थी। जिसमें हृदय में एक बड़े छेद (लार्ज ऑस्टियम प्राइमैटिक एट्रियम सेप्टल डिफेक्ट) के साथ ही हृदय के वाल्व में खून का रिसाव भी होता है (क्लेफ्ट एएमएल विथ सिवीयर माइट्रल रीगर्जीटेशन) इसके साथ ही बच्ची की उम्र को देखते हुए वह बहुत कुपोषित भी थी उसका वजन मात्र 12 कि.ग्रा. था।

हालाँकि यह बीमारी उसे बचपन से ही थी लेकिन पिछले कुछ समय से उसकी कमजोरी बढ़ती जा रही थी और इसी का ईलाज ढूंढ़ते-ढूंढ़ते वे एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुँचे। चूंकि बच्ची की स्थिति बहुत जटिल थी इसलिए इसके ईलाज के लिए दो स्तरों की प्रक्रिया करने की जरुरत थी। सबसे पहले हार्ट सर्जन ने हृदय के छेद (एएसडी) को बंद किया और माइट्रल वाल्व को रिपेयर किया। इसके बाद पीएवीसीडी का ईलाज किया गया। इस बीमारी से जुड़े कुछ और विकारों के कारण उसकी हृदयगति बार-बार कम होती जा रही थी और कई बार नब्ज भी सामान्य से काफी कम हो गयी थी इसलिए चिकित्सकों ने पेसमेकर लगाने का निश्चय किया। जाँचों के बाद पाया गया की मरीज के हृदय का नीचला हिस्सा ठीक से काम कर रहा है इसलिए पेसमेकर को सिर्फ हृदय के उपरी हिस्से में लगाया गया ताकि उसके हृदयगति को सामान्य रखा जा सके।

बड़ों की तुलना में बच्चों में पेसमेकर इम्प्लांटेशन कही अधिक जटिल एवं जोखिमभरा होता है। जाँच से लेकर ऑपरेशन एवं आईसीयु में देखभाल तक बारीकी से योजना एवं क्रियान्वन की जरुरत पड़ती है। एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ सुमंत शेखर पाढ़ी ने ने कहा कि हमें बहुत खुशी है कि इस जटिल प्रक्रिया को हम सफलतापूर्वक कर पाए और उसके बाद बच्ची की स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन दिख रहा है। यह इस हॉस्पिटल का एवं छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा केस था जिसमें इतने कम वजन के कुपोषित मरीज का पेसमेकर इम्प्लांटेशन किया गया।

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